उस दिन चांदनी रात थी
अपने आँगन मैं लेटी हुई थी
ऊपर आकाश और नीचे धरा थी
बड़े आराम और शौक से
दोनों आँखें बंद किये
निजी पसंदीदा मीठी धुनें
मैं सुन रही थी
अचानक आँखें जो खोली तो देखा
ऊपर चाँद मुस्कुरा रहा था
साथ में हजारों तारे बिखरे हुए थे
वे भी झिलमिल कर मुझ से
आँख मिचौली खेल रहे थे
#निजी