# nik_કાતીલ
रविन्द्र नाथ टैगोर की एक बंगाली कविता याद आ रही हे जिसमें उसने कहा था कि
( एक पिता अपनी एक प्यारी सी १० साल की बेटी को कहते हे की बेटी जरा उपर आना मोमबत्ती लेके एक चीज नई मिल रही हे ढूंढनी हे
बेटी मोमबत्ती लेके उपर आती है उसी समय एक हवा का जोका आता है और मोमबत्ती बुझ जाती हे तब वो प्यारी सी बेटी इतना सा कहती हा की पापा में गुम हो गई
और कविता यही ख़तम हो जाती हे
( समझ में आए उसे वंदन ना आए उसे अभिनन्दन)