सफलताओ से मेरे सामर्थ्य का अन्दाजा न लगाये कोई, अब तक लड़ती ही आईं हूँ लड़ाइयाँ कई, जीत या हार बानगी है किस्मत की , सब्र तो इस बात का ठानी है तुझे (किस्मत) बदलने की . फक्र न कर अपनी कामयाबी पर, जीतेगी तो तभी जब हार मान जाऊंगी, मेरे हौसलो पर फैक अब तलवार चाहे कितने ही ढ़ाल बनी हिम्मत मेरी , वार कर तू,अब कितने ही.