अस्त से उदय की ओर चला।
अंधेरे को भगाने का प्रण है लिया।
वचन अपना निभायेगा, कहता है आत्मबल।
अब न तू सुस्त रहे, उठ ध्येय की ओर चल।
कठीन है डगर मगर ना हो विचलित तु।
कोई भी संकट आये, रहे अचल कर्मवीर तु।
बोध शब्दों से बेहतर दिखायें कर्मपर ।
उठ अब न सो, देख चला रवी उदय पर।
#उदय