मै एकांत पसंद करती हूं
मै अकेली बिल्कुल नहीं
साथ हूं खुद के
चाहती हूं ख़ुद से मिलना
कुछ बाते करना अंतर्मन से
जीना चाहती हूं ज़िन्दगी खुल के
चलना चाहती हूं अपने आदर्शों पे
रहना चाहती हूं दूर उनसे
जिन्हें लगता है
मै कुछ भी नहीं उनके बगैर
पाना चाहती हूं स्पर्श प्रकृति का
हो जाना चाहती हूं विलीन
ब्रह्माण्ड के बाहों में
खोना चाहती हूं ख़ुद को
ख़ुद ही को पाने के लिए