वो मुस्कुराती शायरी कहाँ छुप गयी।
मुझसे उलझकर , मुझे सताना उसे अच्छा लगता है।
मै न रहु तो अंदर से रुदाली सुनाती है।
कैसा ये जीवन है उस कली का ?
मैं न रहु खुद को सताना,
मैं जो हुँ तो मुझको सताना।
दिल को रुलाना, दिल को बहलाना
कौनसे पहलू से गुजरती है वो।
#पहलू