यहां सब देख मैं रोया,
कि आंखें सेक मैं रोया!
तज़र्बा तो बड़ा लेकिन,
यहां बस रेंक मैं रोया!
जहां तिनका मिला मुझको,
कि माथा टेक मैं रोया!
बना बस जौहरी घूमा,
मिला सब फ़ेंक मैं रोया!
नशों में तो रवानी हो,
लिए दो पेग मैं रोया!
रहीं राहें यहां तपतीं,
बढ़ा एक डेग मैं रोया!
कीमत भी थी लाशों की,
पकड़ एक चेक मैं रोया!
कलम भी तो रही गिरवी,
कि स्याही फेंक मैं रोया!