तुम्हारे पास से गुजरता था
तो सिहरन दौड़ जाती थी,
जो कुछ मुझमें, कुछ तुममें दिखायी देती थी।
वे भी क्या दिन थे
जब आँखों से आँखें मिला करती थीं,
बिन बात के तूफान खड़े होते थे।
हमारे दिल ने कभी गवाही नहीं दी,
तुम्हारे दिल ने कभी फैसला नहीं सुनाया।
*महेश रौतेला