हूँ कुछ अधुरी ,हूँ कुछ पूरी,
हाँ मै एक पहेली हूँ|
खुद कि गलतियों को मानती हूँ|
खुद कि खूबियों को पहचानती हूँ|
हाँ मैं एक पहेली हूँ|
माना करती हूँ खूब गलतिया
माना रहती हूँ असमंजस मे
पर हिस्सा हूँ कई लोगों के जीवन मे|
हूँ कुछ अधुरी ,हूँ कुछ पूरी,
हाँ मै एक पहेली हूँ|
लगता हैं जो अच्छा पल भर मे,
वही नही भाता दूसरे छण में,
खुद कि पहचान के लिये खुद से ही लड़ती हूँ,
हूँ कुछ अधुरी ,हूँ कुछ पूरी,
हाँ मै एक पहेली हूँ|