वह बेजुबान सा जानवर कितना तिल मिलाया होगा। ठीक से चलना सीख भी ना सका होगा ,शायद जब उसकी मौत को देखा होगा इतने करीब से वह छोटा सा नन्हा सा प्यारा सा मासूमियत में ही अपनी जान गवा बैठा पर रात ढलते ढलते जब वह नहीं लौटा होगा अपनों के पास तो देर रात को उसकी मां को देखो मैंने उस जगह पर जहां वह मौत से जा टकराया ,रोई तिल मिलाई होगी उसकी मां कई बार उसे ढूंढा होगा अपने बच्चे का निशा पर हाथ ना या फिर भी वह नहीं जा पा रही थी वहां से दूर वह बेजुबा है पर फिर भी कितना प्यार है उनके रिश्तो में इंसान है जो भूल बैठा है वह प्यार का रिश्ता,,,,,,(आज शाम जब बालकनी में पढ़ रही थी तभी एक छोटे से कुत्ते की चीख सुनी सिटी बस वाले ने जानबूझकर उसे कुचल डाला और जब देर रात में मैंने देखा तो वहां एक बड़ा कुत्ता रो रहा था और वहां से दूर ही नहीं जा रहा था यह सब मेरे आंखों के सामने हुआ इसीलिए बस यहां पर प्रस्तुत किया...)
-बिंदु अनुराग