लक्ष्य जिसकी ढाल हो.. जीवन उसका कमाल हो.. संस्कार जिसके भाव हो.. जीवन में हर खुशी का उसको लगाव हो.. ब्रह्मदत्त त्यागी
आज का एक महत्वपूर्ण विचार एवं सत्य वचन ब्रह्मदत्त
रावण जब मृत्यु शय्या पर था,
तो उसने श्रीराम से एक बहुत ही अच्छी
बात कही कि, मैं तुमसे हर मामले में बड़ा हूँ,
उम्र में, बुद्धि में, बल में,
मेरा कुटुम्ब भी तुमसे बड़ा है,
मेरी लकां सोने की है, धन दौलत में भी मेरा
राज्य भी तुमसे बड़ा है,
इन सबके बाद भी में हार गया,
जानते हो क्यों,
क्योंकि तुम्हारा भाई तुम्हारे साथ था,
और मेरा भाई मेरे खिलाफ था.
अंदरुनी एकता बनाये रखो,,
क्योकि :- किसी भी पेड़ के कटने का
किस्सा न होता, अगर कुल्हाड़ी के पीछे
लकड़ी का हिस्सा न होता
जीवन में जीवन को ही समझ पाना एक सबसे बड़ा कर्म है हमारे अच्छे संस्कार हमारे जीवन को सफल बना देते हैं और हमारे बुरे कर्म हमारे जीवन को जीते जी भी नष्ट कर देते हैं.. ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़