हो जाता है फासला, यूं ही नहीं बन पाते कुछ रिश्ते
खो जाते हैं ख्वाब कुछ अधूरे...
नहीं मिल पाती उनको एक नई सास
आ ही जाता है उजाला जब छा जाता है अंधेरा
कुछ लोग मिल जाते हैं ऐसे ही बस जेसे मिले ना हो कभी पहले
मिल जाती है कुछ मंजिले इस तरह की हो जैसे हो जानी पहचानी
जिंदगी है एक कारवां कि जहां मौत को भी दस्तक देनी पड़ती है
पता नहीं कब कहां कैसे कब क्यों हर रोज एक नया दौर लगता है
फिर भी सांस लेना जैसे जरूरत बन गई है...
बिंदु अनुराग