*प्रातः वंदन* 🙏🏽
*प्रकृति में सभी वृक्ष को पानी*
*एक समान ही मिलता है,*
*फिर भी फल कडवा मीठा खट्टा होता है*
*यह दोष पानी का नही है,*
*यह दोष अगर है तो बीज का है*
*बीज मे पुरें वृक्ष या पौधे को*
*कैसा बनना होगा ईसकी ब्लूप्रिंट*
*तैयार होती है ईसे हम*
*संस्कार कह सकते है*
*वैसे ही हम मनुष्य सभी कद काठी से*
*लगभग एक समान है*
*परन्तु हमारे संस्कारों के कारणवश*
*हमारी सोच संस्कृति और संरचना*
*अलग अलग होती है*
*हमारे संस्कार हमें विरासत में मीलते है,*
*विज्ञान ईसे डीऐनऐ के नाम से जानता है*
*जन्म के प्रश्र्यात हमारे संस्कार में*
*बदलाव के प्रयोग भी हुए है*
*हमें समझना होगा कि संस्कार में बदलाव*
*हमारे कर्म और कर्तव्य के आधार पर होते है*
*हमें हमारी जीवनशैली संस्कार में*
*अच्छे बदलाव करने चाहिए*
☘ *सुप्रभात* ☘