ज़िंदगी में सफल या निष्फल...?
जब मान जाऊ हार तो तू हँसा देती है
तो फ़िर खुशियों में कैसे रुला देती है
जितना तुजे जानू, तू अनजाने सी लगे
तुजे मिलने की आश में मन बावरा सा यहा-वहा भागे..
नए-नए किरदार दिखाये तू रोज़...
कभी पुराने यार से भी मिला दे !
बाकी हर रिश्ते झूठे तुजसे अटूट बंधन है
फिर भी कभी बेगाना सा कर दे...!
मुझे जूठा मुस्कुराना, नज़रे चुराना, डरना, घबराना ,हिचकिचाना सीखा देती है... समजोता करना भी और?
ओर पता नहीं क्या क्या ??
पर फिर भी जब में खूबसूरत नजारे देखती हूँ !
पर फिर भी जब कुछ मुस्कुराहटें देखती हूँ !
ओरो के अंदर बसा मेरे लिये प्यार देखती हू!
मैं तेरे साथ होती हूँ
सुन ओय
ज़िंदगी
में तेरे साथ होती हूँ
-दिवांगी जोशी