अनकहे थे जो जज्बात मेरे दिल के,
लब्ज़ो से मिल गई उसे एक पहेचान ।।
कलम से दोस्ती क्या हुई मेरी,
कागज भी बन गए मेरे राज़दार।।
बरसो से दबे हुए थे जो एहसास,
कलम से मीला उसे एक आयाम।।
आँखो के आँसू, होठो की हँसी,
बनकर श्याही उभर आए पन्नो पर।।
अल्फाज़ो में क्या ढ़ाला इसे आज,
इसे बून के बन गई है एक कविता।।
♡ तमन्ना ♡