अतीत के पन्ने उलटते हैं तो मन में उठता है ज्वार
अपनी जवानी के दिनों में हो गया था हमे भी प्यार
दिल ही दिल में कर लिया था हमने उनसे करार
डरते थे हम खुद से इसलिए न कर पाए इजहार
अपने ही दिल से हमारी रोज होती थी तकरार
क्या करें खुद पर न आया हमे कभी भी ऐतबार
मेरे घर के सामने से रोज गुजरती थी वो गुलनार
न जाने कब हमें हो गया था उनसे मन ही मन प्यार
करते थे सुबह शाम हम उनके निकलने का इंतजार
उनको देखने को मचलता था दिल हमारा बार बार
अपने दिल में बना रखा था हमने उनका आवास
वो मेरे दिल की धड़कन है न था उन्हें किंचित आभास
हर रोज़ सुबह से शाम तक हम रहा करते थे बेताब
आज करेंगे आज करेंगे हम उनसे अपने दिल की बात
एक झलक पाकर उनकी हम देखने लगते थे ख्वाब
बड़े मुश्किल से अपने दिल के संभाल पाते थे जज्बात
इसी तरह निकलते रहे हमारे जीवन के दिन और रात
सपनो के आशियाने में हम करते थे तब निवास
ख्वाबों में अक्सर उनसे हमारी हो जाती थी बात
हाथ पकड़ कर हम दोनों चला करते थे साथ साथ
बिन देखे उनको हमे आता नहीं था जरा भी करार
जितना भी देखते उतना हम हो जाते थे बेकरार
वक्त निकलता रहा हम करते रहे बस यूँ ही इंतजार
सोचते रहे मौका देखकर हम करेंगे प्यार का इजहार
अक्सर नजरों से उन्हें हम भेजते रहे प्यार का पैगाम
हमे लगता था नजरें झुकाकर करती थी हमे सलाम
देख देखकर उन्हें हम लगाते रहें मन में यही कयास
कभी तो वो दिन आएगा जब होगा उन्हें अहसास
प्रेम पथिक बनकर चले हम करते रहे नजरों से प्रयास
उनके दिल में जगह मिलेगी पूरी होगी मन की आस
वक्त अपनी रफ्तार से बस यूँ ही सफर तय करता रहा
जिन्दगी की उहापोह में हमारा भी समय कटता रहा
अनायास एक दिन उन्हें घर की दहलीज पर खड़ा पाया
दिल की धड़कन बढ़ गई और कलेजा मुंह को आया
उन्होंने मेरे हाथ में अपनी शादी का खूबसूरत कार्ड थमाया
मुझे लगा मै आसमां से गिरकर सीधे जमीन पर आया
इस तरह मेरे प्यार का सफर बीच में ही हो गया खत्म
तब से आज तक हम जिंदगी में रोज मना रहे मातम