🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 27 फरवरी 2020*
⛅ *दिन - गुरुवार*
⛅ *विक्रम संवत - 2076*
⛅ *शक संवत - 1941*
⛅ *अयन - उत्तरायण*
⛅ *ऋतु - वसंत*
⛅ *मास - फाल्गुन*
⛅ *पक्ष - शुक्ल*
⛅ *तिथि - चतुर्थी 28 फरवरी प्रातः 06:44 तक तत्पश्चात पंचमी*
⛅ *नक्षत्र - रेवती 28 फरवरी रात्रि 01:08 तक तत्पश्चात अश्विनी*
⛅ *योग - शुभ सुबह 10:28 तक तत्पश्चात शुक्ल*
⛅ *राहुकाल - दोपहर 02:06 से शाम 03:32 तक*
⛅ *सूर्योदय - 07:02*
⛅ *सूर्यास्त - 18:40*
⛅ *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी*
💥 *विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *बुढ़ापे में झुरियाँ से बचने हेतु* 🌷
👉🏻 *बड़ी उम्रवालों को सुखा नारियल चबाके खाना चाहिये तो झुरियाँ नहीं पड़ेगी | नारंगी खाना चाहिये तो झुरियाँ नहीं पड़ेगी |*
🙏🏻 *- Pujya Bapuji Bhopal 8th July 2013*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞
🌷 *मास अनुसार देवपूजन* 🌷
➡ *माघ मास में सूर्य पूजन का विशेष विधान है | भविष्य पुराण आदि में वर्णन आता है | आरोग्यप्राप्ति हेतु बोले, माघ मास आया तो सूर्य उपासना करों |*
➡ *फाल्गुन मास आया तो होली का पूजन किया जाता है.. बच्चों की सुरक्षा हेतु |*
➡ *चैत्र मास आता है चैत्र मास में ब्रम्हा, दिक्पाल आदि का पूजन कियाजाता है ताकि वर्षभर हमारे घर में सुख-शांति रहें |*
➡ *वैशाख मास भगवान माधव का पूजन किया जाता है ताकि, मरने के बाद वैकुंठलोक की प्राप्ति हो | ॐ नमो भगवते वासुदेवाय... |*
➡ *जेष्ठ मास में यमराज की पूजा की जाती है ताकि, वटसावित्री का व्रत सुहागन देवियाँ करती है | यमराज की पूजा की जाती है ताकि, सौभाग्य की प्राप्ति हो, दुर्भाग्य दूर हो |*
➡ *श्रावण मास में दीर्घायु की प्राप्ति हो, श्रावण मास में शिवजी की पूजाकी जाती है | अकाल मृत्यु हरणं सर्व व्याधि विनाशनम् |*
➡ *भाद्रपद मास में गणपति की पूजा करते है की, निर्विध्नता की प्राप्ति हेतु |*
➡ *आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में फिर पितृ पूजन करते है की, वंश वृद्धि हेतु | और अश्विन मास के शुक्ल पक्ष में माँ दुर्गा की पूजा होती है की, शत्रुओं पर विजय प्राप्ति हेतु नवरात्रियों में |*
➡ *कार्तिक मास में लक्ष्मी पूजा की जाती है, सम्पति बढ़ाने हेतु |*
➡ *मार्गशीर्ष मास में विश्वदेवताओं का पूजन किया जाता है कि जो गुजर गये उनके आत्मा शांति हेतु ताकि उनको शांति मिले | जीवनकाल में तो बिचारेशांति न लें पाये और चीजों में उनकी शांति दिखती रही पर मिली नहीं | तो मार्गशीर्ष मास में विश्व देवताओं के पूजन करते है भटकते जीवों के सद्गति हेतु |*
➡ *आषाढ़ मास में गुरुदेव का पूजन करते है अपने कल्याण हेतु और गुरुदेव कापूजन करते है तो फिर बाकी सब देवी-देवताओं की पूजा से जो फल मिलता है वोफल सद्गुरु की पूजा से भी प्राप्त ही सकता है, शिष्य की भावना पक्की हो की – सर्वदेवो मयो गुर