*प्रातः वंदन* 🙏🏽
*बारिश की बुँदे सांप और सीप*
*दोनों के मुंह में एक जैसी गिरती हैं*
*लेकिन सांप उससे ज़हर बनाता है*
*और सीप मोती हालात बस हालात हैं*
*न अच्छे न बुरे ये हम पर निर्भर करता है*
*हम अवसर का कैसा उपयोग करते हैं*
*इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है*
*खुदके मन की होतो बहुत अच्छी लगती हैं*
*दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है*
*अहँकार की बस एक ख़राबी है*
*ये कभी आपको महसूस ही*
*नहीं होने देता कि आप ग़लत हैं*
*समन्दर में भले ही पानी अपार है*
*पर सच तो यही है कि वो*
*नदियों का उधार होता है*
🍁 *सुप्रभात* 🍁