बस एक तुम ही हो
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तुम अगर बेठो सामने ,तो शायरी की क्या औकात है।
बस हल्का मुस्कुरा देना,तेरी मुस्कुराहट ही मेरी पहचान है।
कुछ साथ बिताए वो हसीन पल, किसी बारिससे क्या खास हैं।
तेरी हथेली में मेरा हाथ, जैसे बादल जैसा हल्का ढलान है।
हो अगर तू आसपास तो, सभी दर्द बेजुबान है।
न हो पास फिर भी, हवाओ में तेरा अहसास है।
कुछ तो अब करले लिहाज मेरी हालत का ।
तेरा ही दिया दर्द बेशुमार है।
ना चाहे तू भी मुजे मेरी तरह, तो कोई बात नही।
पर दिलको दे जूठा दिलासा, ये फर्ज भी तेरा आज है।
ना कर कोई जूठा वादा , चलो ना ही सही।
पर बिना वादे के निभाना ,भी तो प्यार का आगाज है।। - भावना ग जादव