कड़वाहट
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मिठि तो जुबान ही है आजकल,
दिल में तो अभीभी कड़वाहट है।
सामने सब तारीफ करते है,
पीछे जहर उगलते है।
कुछ तो लिहाज रखो इंसानियत का यारो,
की दिल मे जो हो , जुबान से बयान हो।
मुश्किल हालातों का एक अच्छा रूप भी देखा मेने,
अच्छे अच्छे पहचाने है तब मैंने।
खोजा सारा। जहा एक उम्र गुजरते वक़्त,
अपनो के अलावा सब मतलबों का कारवाँ है।
कभी फुर्सत में भी सोचा मेने,
क्या भावनाओ का यही सिला पाया मैने।
दुसरो की नाव को किनारे लाने के चक्कर मे,
ये ख्याल आया कब अपनी कश्ती डुबोई मैंने।
भावना ग. जादव