आस्मां पर क्या इन्क़िलाब लिखोगे,
तुम्हारे ज़हन में ज़हर भरा जा रहा है..
जरा गले से लगाकर तो देखो अपने भाईओं को,
क्युँ तुम्हारे अंदर का हिन्दुस्तानी मरा जा रहा है??..
कुछ भटक गए,कुछ भटकाए गए,
पता भी नहीं ये रास्ता कहाँ जा रहा है..
किसी को हूर का,किसीको नूर का
"इनाम" मरने के बाद दिया जा रहा है..
पता नही है किसीको मौत के बाद की जन्नत का,
पर जीते जी इस जन्नत से बेदखल किया जा रहा है..
~अद्वैत