सुदंर हास्य कविता ..
विषय .चाय ।
कलियुग में चाय महारानी की महिमा निराली हैं ।
चाय के दशर्न से आठो धामों के दशर्न हो जाते हैं ।।
चाय के आगे छप्पन भोग भी फीके लगते हैं ।
चाय के बिना सुबह और पुरा दिन सूना सा लगता हैं ।।
चाय के बिना मेहमान नवाजी हो ही नही सकती हैं ।
भगवान के दशर्न सुबह में न हो तो चलेगा ।।
पर चाय देवी के दशर्न जरुर हो जाने चाहिए ।
चाय महारानी के कयी रुप कलियुग में हैं ।।
कड़क चाय ,फीकी चाय ,मीठी चाय ,अदक मसाले वाली चाय इन रुपो में महारानी मिलती हैं ।
चाय की चुस्की का आनंद ओर कही नही मिलता हैं ।।
चाय महारानी सभी जगह मिल जाती हैं ।
इसकी प्रसिद्धि के आगे सबकी प्रसिद्धि फीकी लगती हैं ।।
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