वैसे तो ये सफर इतना बुरा भी नहीं है।
लेकिन अगर तुम साथ होते तो,
ये कुछ हसीन हो जाता।
वैसे अकेला नहीं हूं मैं इस राह पर हजारों गुजरे हैं।
फिर हाल अकेला हु पर फिर भी
इस राही के साथ ये राह है।
बातें भी हो जाती है,
ठोकर पे गाली तो, फूलों की वाहवाही हो जाती है।
पर तुम जो साथ होते तो,
हाथ पकड़कर कुछ कदम चुपचाप चल लेते।
दौपहर में गर सुरज नाराज़ हो तो,
तुमको पानी पुछते।
कहीं काटा चुभ जाए हमें तो,
हम नीकालते मगर एक प्यारी फुक मारने को कहते।