कोई ख़्वाब आँखों से रूठा तो है
कोई फूल हाथों से छूटा तो है
नहीं तो मस्तिष्क में न शून्यता होती
नहीं तो साँसों में न कराह होती.....
कोई सुर तारों से रूठा तो है
कोई साथ जीवन का छूटा तो है
नहीं तो मस्तिष्क में न शून्यता होती
नहीं तो साँसों में न कराह होती.....
कोई आधार विश्वास का छूटा तो है
कोई धागा स्नेह का टूटा तो है
नहीं तो मस्तिष्क में न शून्यता होती
नहीं तो साँसों में न कराह होती.....