नीशब्द हुंआ हू में तेरे याद मे
तुम्हारे प्रतीक्षा के बोझे तले खडा हुं में
आओ ना जलदी
थोडी सी ही सांस बची है
कितने दिन तुम्हारे विरह में जी रहा हुं
तुम्हे देखने के लिये ये मेरा मन ओर मेरी आंखे तरस रही है
अब अाओना जलदी,
पुनः मेरे शब्द तुम्हा रे लिये व्यस्त हो जायेगे
शब्दो के हार बन जाए गे
मेरे ओंठो के पुराने गाने पुनः तराने हो जायेगे
तुम संग होली खेलने मे रंग बन जाऊ
जिने का सपना मन में लिये
मे सिर्फ तुमारा बन जाऊ
शायद अब तुम समझ लोगी मेरे अबोल प्रेम को
खील जाऊ , उभर जाऊ में तेरे प्यार को
नीशब्द हुंआ हू में तेरे याद मे