आत्मा नहीं कहती
चिड़िया नहीं बोलती
अब चहचहाया नहीं जायेगा,
वसन्त नहीं कहता
अब आया नहीं जायेगा,
ठण्ड नहीं बोलती
अब बर्फ नहीं गिरेगी,
नदी नहीं कहती
अब बहा नहीं जायेगा,
फूल नहीं सोचता
अब खिला नहीं जायेगा,
प्यार नहीं कहता
अब भेंट नहीं होगी,
शब्द नहीं कहते
अब गीत नहीं होंगे,
थिरकन नहीं सोचती
अब नाच नहीं होगा,
सुबह नहीं कहती
अब जगना नहीं होगा,
आत्मा नहीं कहती
अब अमरता नहीं होगी,
जीवन नहीं सोचता
अब चलना नहीं होगा।
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**महेश रौतेला