कुछ धुंधला सा
कुछ जाना पहचाना सा
याद तो है पर ठीक से याद नहीं
वह लम्हा जो गुजर गया
जैसे वह सुनहरी याद बन गया
कुछ ठहरा सा वह पल
कुछ दो घड़ी सा सुकून सा वह पल
कुछ अनकहा सा पर बहुत कुछ कहने वाला वो पल
रात के सन्नाटे सा तो सुबह की पहली किरण सा
कुछ भूली दास्तां सा तो कुछ प्यारा सा
वह लम्हा जो गुजर गया
वह दो पल का सुकून दे गया
वह लम्हा जो गुजर गया
बिंदु अनुराग