मे गवा-ऐ-खुदा का जुठ
ना जाने कब सवार -ऐ- दिल कर गया,
तुम अहेसास करती मेरे दिल -ऐ-दर्द
का गुरूर पीगलता तेरा,
हमने भी सॅंवारा धागा-ऐ-रेशम तु
कच्चे धागे शी नीकली,
आदत तो मेरी चांद-ऐ-रोशनी सी है
तुने कफन चढा दिया,
खुश्बु-ऐ-कस्तुरी सा है ईस्क
तुने मिट्टी-ऐ-लगाना समजा
~सौरभ