सुदंर रचना ...
संसार ।
इस जमाने की रीत अनोखी हैं ।
बिना स्वार्थ के यह प्रीत न करता है ।
जब तक कुछ मिल न जाता हैं ।
तब तक यह साथ न चलता हैं ।
सुख में सबके साथ चलता हैं ।
दुःख में यह कभी साथ न देता है ।
अजीब पहेली है यह जग की ।
बलशाली के सामने शीश झुकाता है ।
कमजोर को यह खुब सताता है ।
कभी किसी से निस्वार्थ प्रेम न करता है ।
मानवता की हमेशा हंसी उडाता हैं ।
इसको समझना है अति मुश्किल ।
भगवान भी उसे आज तक समझ न पाया ।
पर मजेदार है यह जग की पहली ।
यह सच्चाई का कभी साथ न देता है ।
झुठे ,धौखेबाज का साथ यह देता हैं ।
यह हमेशा खुशीयों में गीत गाता हैं ।
दुःख में कभी भी न आंसू बहाता हैं ।।
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