वक्त से हारी मुरादों का फकत ढेरा ही है ना ?
आइने मुजको बता दे, अक्स ये मेरा ही है ना?
है गुमा दुश्मन को ये , हम मिट चुके उनकी बदौलत
खत्म जिसने कर दिया, अपनों का वो घेरा ही है ना?
जिस्म की जंजीर में, हरदम नफ़स है फड़फड़ाती
छोड़ के छुटता नहीं, जन्मों का ये फेरा ही है ना?
हसरतें मेरी जला के, रोशनी देते है अक्सर
गर्दिशो में वो सितारों का छुपा डेरा ही है ना?
मैं चुकादूं इक जनम में, सौ जनम का सब हिसाब
पूछती "चाहत" खुदा से, फैसला तेरा ही है ना?