हे शारदे:
स्वर में अपना स्वर मिला दे
आभा समय की सस्वर कर दे,
प्राणों की निर्भय उड़ान में
अपने स्वर का लय मिला दे।
जीवन के शाश्वत लक्ष्य में
सरल शब्दों से सत्य घोल दे,
मन की उर्जा तेजोमय कर
सुख के गांव-शहर बना दे।
नव उमंग की नयी ताजगी
जिह्वा से नि:सृत कर दे,
जड़ -चेतन के शान्ति वेग को
ममतामयी स्पर्श थमा दे।
*महेश रौतेला