"रब" ने नवाजा हमें जिंदगी देकर;
और हम"शौहरत" मांगते रह गये;
जिंदगी गुजार दी शौहरत के पीछे;
फीर जीने की "मौहलत" मांगते रह गये
ये कफन, ये जनाजे, ये "कब्र "
सिर्फ बातें है मेरे दोस्त,
वरना मर तो ईंसान तभी जाता है
जब याद करने वाला कोई ना हो!!
ये समंदर भी तेरी तरह खुदगर्ज निकला,
जिंदा थे तो तैरने न दिया और
मर गये तो डूबने न दिया ..
क्या बात करे इस दुनिया की
"हर शख्स के अपने अफसाने है"
जो सामने हैं उसे लोग बुरा कहेते हैं
जिसको देखा नहीं उसे "खुदा" कहते है
...........हरिवंशराय बच्चन