My Children Day Poem ...!!!
"बचपन का ज़माना था
जिसमें खुशियों का ख़ज़ाना था
चाहत थी चाँद को पाने की पर
दिल सिफँ तितलीका दीवाना था
खबर न थी कुछ सुबह की न
शाम का कोई ठिकाना था
थककर आना स्कूल से पर
खेलों को खेलने भी जाना था
माँ की ममता भरी कहानी थी
नाज़ुक परियों का फसाना था
बारिश की काग़ज़ की नाव थी,
अपना वो हर मौसम सुहाना था
ना फ़िक्र कल की ना आज का
कोई ग़म था जाँ में था दम-ख़म
अल्हड़ मस्त बिन्दास मिज़ाज था
उस पर दोस्तों का झुरमुट था..!!
काश कि लौटता बचपन बाँवरा।
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