जलता हुआ दिया
जले मन मेरा, जैसे जले एक छोटासा दिया
ओ पिया, काहे जलाए तु मोरा नन्हासा जिया
धुंडे तुझे पल पल यह मोरे नैन , ओ मेरे पिया ।
बस अब चुप चाप मैंने है आंसू पीना सीख लिया
फिर भी, तेरे बिना अब तक सीखा नहीं है जीना
बता जा आके एक बार, कैसे जियू तेरे बिना
कह दू तुझे, न दिल मेरा मजबूत है, ना ही सीना
मौत के पहले यह बुझता दिया चाहता है (जलना) जीना ।
Armin Dutia Motashaw