My New Poem...!!!
जीवन बहुत छोटा है।
इसे खुल के जियों।
क्रोध खुला शत्रु है।
उस पर काबु रखो।
भय बहुत भयानक है।
उसका दँट के सामना करो।
स्मृतियाँ बहुत सुखद है।
उसे सीने में संजोएँ रखो।
अगर आपके पास मन की।
शान्ति है तो समझ लेना
आपसे जादा भाग्यशाली।
इस जग में और कोई नहीं।
प्रभु-प्रेम बहुत दुर्लभ है।
उसे व्यवहार में रखो।
क्योंकि हर बंदे में प्रभुजी
खुद ही बसत रहत है।
बाकि क्षणिक मिथ्या भौतिक
सुख के लिएँ तो लौंग ईमाँ तक ...!!!
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