My New Poem...!!!
उम्र भर का रिश्ता चार
ही पल में ज़ुदा हो गया
बात कुछ भी नहीं मसला
बस खयालो का हो गया
जिन खयालोने मिलाया था
उसी में अब फ़ासला हो गया
वफ़ा की राहमें हमकदम रहे
जिस्मों का तबादला हो गया
उलफत-ए-रस्म तो निभाए
बबाल निवालो का हो गया
दिखावें की चौखट पर उज़ुम
महज़ सवालों का हो गया
ख़ुद्दारी अपनी तो बरक़रार थी
पर जँजाल ईमानो का हो गया
हमसे तो कट भी जाते फ़ासले
उनके ख़यालोंका कमाल हो गया
“रुँह”से “रुँह”की दुरियाँ तो न थी
जिस्मों का पर मलाल हो गया।
✍️✍️🌸🌹🙏🙏🌹🌸✍️✍️