खुद को मेरी नजरों से इतना भी मत बचाया कर
कभी कभी बारिश मे ख़ुशी से भी भीग जाया कर
चाँद तुझे तो कोई लाके देगा नहीं
तुम खुद चाँद है ये खुद को समझया कर
दर्द हिरा दर्द मोती है
यूही दर्द को आँखों से मत बहाया कर
काम ले अपने हसीन होठो को
कभी बेबात मुस्कराया भी कर
धूप भी मायूस लोट जाती है
कभी तो छत पे भी आजाया कर
मैरी जिंदगी मे आये ना आये
कभी नजर तो आया कर
एक तमन्ना