ठंड में मूँगफली, सिर्फ मूँगफली नहीं होते,
प्यार की ऊष्मा लिए
पहाड़ की ऊँचाई को पकड़े होते हैं।
हाथों के उत्तर
चलते कदमों के साथी,
क्षणों को गुदगुदाते
बातों को आगे ले जाते,
सशक्त पुल बनाते
उनको और हमको पहिचानते,
तब मूँगफली, सिर्फ मूँगफली नहीं होते।
(वही मूँगफली जो साथ-साथ मिलकर खाये थे।)
**महेश रौतेला