My New Poem...!!!
ज़िंदगी मै उतार चढ़ाव आते रहते है
उसका दट़के मुकाबला करना चाहिए
जीवन-पथमें कभी_कभी हार भी एक
पड़ाव है उससे निराश नही होना चाहिए
बल्कि हार के बाद जितना ही हमारा
सदैव लक्ष्य व कर्तव्य होना चाहिए
वैसे भी भागती-दौड़ती इस महान व
फ़ानी जीदगीं में सफ़ल वही होते है
जो बार बार गिर कर भी सँभलने का
हुनर अपने कँधे के भाथें में रखते है
मच्छीँ की ऑंख के लिए अजुँनको एक
ही तीर चाहिए था पर भाथें में अनेक थे
कोशिशोंकी कशिश़ ही मँझिलकी राह
विफलताओं की दूबँलताऔसे ना आह
बस खड़ा जो हर मोड़पे चट्टानोंसी चाह
लिए दर-असल वही सिकंदरकी पनाह
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