एक दिन:
एक दिन विदा हो जाऊँगा
अपने घर से,
डूब जाऊँगा
इसी आसमान में,
बच्चों से विदा लेना
रिश्तों से अलग होना
आदमी का आदमी से बिछुड़ जाना
समय का स्वभाव है,
ईश्वर का विधान है।
जो हाथ मैंने पकड़ा
कल छूट जायेगा,
जो साथ मैंने पकड़ा
कल वह टूटेगा।
मेरी अपनी सत्ता
कहीं और पड़ाव डालेगी।
भूचाल जो आया
वह भी थमेगा,
अंधकार के भीतर
बहुत कुछ डूबेगा,
प्रकाश की लौ से
अनंत भी खुलेगा।
एक दिन अपना ही घर
मुझे छोड़ देगा,
हवाओं की ताजगी
मुझे उड़ा ले जायेगी
क्षितिजों के उस पार।
फिर मैं डूब जाऊँगा
इसी आसमान में।
**महेश रौतेला