तुम्हारी
संसार छोड़ कर, मीरा बनी तोरी दासी,
राधा भी जनम भर रही प्यासी,
तेरे बिना यहां भी छाई है उदासी
मै भी हरी दर्शन की हूं प्यासी ।
हर कोई तुम पर है वारी, मेरे गिरिधारी
दर्शन कब दोगे, नज़र कब आओगे मुरारी
याद रहे कान्हा, मै भी हूं तुम्हारी;
एक बार, बस एक बार पुकारो, कहके "प्यारी"
Armin Dutia Motashaw