Hindi Quote in Poem by Jigisha Raj

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

'चाय वाली खिड़की'

सुबह सुबह बाल्कनी में वो दिखता है।
रोज़ की तरह बच्चों को स्कूल भेजकर,
अपने me time के लिए
मैं बाल्कनी में खड़ी रहती हूँ,
हाथ में कॉफी लिए।

वो खिड़की सामने ही पड़ती है।
कभी कभी वो भी नज़र आ जाता है।
वैसे तो वो खिड़की उसका किचन है,
पर उसे अक्सर में वहीं देखती हूँ |
शायद चाय बनाते हुए।

वैसे देखा जाए तो कुछ भी तो नहीं है।
सब अपना काम करते हैं।
मैंने तो सुबह ही खाना बना लिया।
पर पता नहीं उस खिड़की में क्या है?
देखने के लिए ।

मैं धूप के लिए खड़ी रहती हूँ |
फिर क्यों नज़र वहाँ चली जाती है?
वो सिर्फ अपनी मस्ती में होता है |
उस घर में कोई और दिखता नहीं,
शायद होगा भी नहीं |

किसी को इस तरह देखना अजीब नहीं?
पर वहाँ सिर्फ चाय ही बनती है,
यह यकीन से कह सकती हूँ मैं,
क्योंकि मैं उस भांप को ही ताकती हूँ,
और कोफ़ी ठंडी हो जाती है!

शायद अब मुझे चाय बनानी चाहिए,
क्योंकि कुछ दिनों से,
वो खिड़की बंध ही रहती है,
बाल्कनी में धूप नहीं, बादल सा है,
और बच्चों की छुट्टियां हो चली है!

© जिगीषा राज

Hindi Poem by Jigisha Raj : 111296973
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now