26/११
वतन के लिए दे दी थी उन्होंने, अपनी जान;
बिना झिझक हो गए थे यह वीर कुर्बान ।
आज उसी याद को जगा कर, करे उनका सनमान
कब दुनियां आपसी भाईचारा बढ़ाएगी, कब रुकेगा तूफ़ान ??
बनके मौत के फरिश्ते, क्यू बेचते हैं लोग मौत का सामान ??
क्या कोई भी भगवान चाहेगा निर्दोष इंसानों की जान ??
प्रेम श्रृद्धा के सुमन चढ़ाके करें उनका सनमाम ।
जय हिन्द, जय हिन्द की सेना ।
Armin Dutia Motashaw