गज़ल
तुम को अपनी जाने वफ़ा मानता है दिल।
तुम हिं हो बेवफा ये जनता है दिल।।
तुम को अपनी....
तुमने दिया जो धोखा तो क्या गलत किया।
दिखावे के प्यार को तो पहचानता है दिल।।
तुम को अपनी.....
तुम हो हसीन दिलरुबा जानेंजा जाने बहार हो।
तुम्हारी हसीन मुलाकात को अब पहचानता है दिल।।
तुम को अपनी...
तुम हो अमीर जाने जिगर इस कायनात में।
हम भी बजीर कायनात के ये मानता है दिल।।
तुम को अपनी....
तुम हो नसीली जाम सी आंखों में झील है।
हम भी तो इन आंखों में डूबा हुआ है दिल।।
तुम को अपनी जाने वफ़ा मानता है दिल।