सुंदरता
जबलपुर के एक प्रसिद्ध महाविद्यालय में सहशिक्षा के माध्यम से बी.काम की पढ़ाई होती थी। इसके वार्षिक समारोह में प्रस्तुति देने हेतु छात्र छात्राएँ सज-धज कर आये हुए थे। उनके बीच में यह चर्चा चल निकली कि कौन सबसे आधुनिक, सुसंस्कृत एवं सुंदर कपडे पहना हुआ है। उसी समय उनके नृत्य के शिक्षक तैयारियाँ देखने के लिए आये। उन्हें देखकर सभी छात्र छात्राओं ने उनसे अनुरोध किया कि आप इस बात का फैसला करें कि हम सब में कौन सा छात्र एवं कौन सी छात्रा का परिधान सबसे सुंदर है ?
उन्होंने सभी उपस्थिति जनों को विद्यालय के बाहर बैठे एक गरीब लडके की ओर ध्यान देने का निवेदन करते हुए कहा कि देखो वह गरीब लड़का इस गर्मी में भी अकेला बैठकर प्यासे लोगों को पानी पिलाने हेतु प्याऊ खोलकर बैठा है। उसके साथ साथ जो अपाहिज और विकलांग लोग सडक को पार करना चाहते है उनकी भी मदद करके उन्हे सडक पार करा रहा है। वह कितना अच्छा काम कर रहा है उसके मन की भावनायें कितनी अच्छी है। तुम लोग आपस में बाहरी सुंदरता को देखकर प्रसन्न हो रहे हो, उस बालक की अंदरूनी सुंदरता को देखने का प्रयास करो। तन की सुंदरता तो अस्थायी होती है परंतु मन की सुंदरता में स्थायित्व होता है। यह सुनकर सभी छात्र छात्राओं ने भाव विभोर होकर निर्णय लिया कि वार्षिक समारोह में धन का अपव्यय रोककर उस बचत को वे सभी अपनी और महाविद्यालय की ओर से उसकी पढाई और अन्य व्यवस्थाओं हेतु उसे देने का संकल्प लेते है।