किस्तों में ही उलझी हुई है जिंदगी
अब तो खुशियों के भी दाम है
चुकाना मुश्किल..
जो भी मिलता है किस्तों में
ही मिलता.. एक एक कर के
है चुकाना..
सबकुछ है अब शर्तो पर मिलता
चाहे प्यार हो या पैसा
इन्सान इतना चालाक है की
अब तो वो भगवान के
साथ भी लगाता शर्तें
ओर फिर भी ना माने तो
दे रहा है रिश्वत..
इस दुनिया में सब है मिलता
किस्तों में..सब मिलता किस्तों मैं..Manda.