मेरे दोस्त
मेरे दोस्त
अभी-अभी बर्फ गिरी है,
मन में हिमानी बादल तैर रहे हैं।
चिड़िया ठिठुरती
वृक्ष के डाल पर बैठी,
मुझे देख रही है।
सफेद चादर सी बर्फ पर
चलने के निशान,
अब भी शेष है।
बिटिया गले में हाथ डाले
चिड़िया सी फुदक रही है,
जीवन का व्यास समय के साथ
बढ़ रहा है,
मौसम खुलने का इन्तजार है।
मेरे दोस्त
पिछले साल की तरह इस साल भी
बर्फानी मौसम चल रहा है,
धूप मन में बिखरी पड़ी है,
कहानी-किस्से कुछ कम हो गये हैं,
दो-तीन बुजुर्ग स्वर्ग सिधार चुके हैं,
जंगल की छाया कम हुयी है,
सजने-सवरने का दर्शन जीवित है,
अभी मौसम खुलने का इन्तजार है।
*महेश रौतेला