*' हंसी '*
मैं तेरह, वह सोलह की थी
पड़ोस की वह लड़की थी
मुझे कंकर मार हंसी थी
ठिठोली से मैं गुस्साया
उसके बाल नोचे थे
वह रोयी, मैं हंसा था
सिलसिला यूं ही होता था
वह मुझे मिठाई, चॉकलेट
बहुत खिलाती थी
कोने में गले लगाती थी
बालों को सहलाती थी
यादें शर्माहट,गर्माहट की
आज भी मैं नहीं बिसरा
पड़ोस की वह लड़की थी
मुझे कंकर मार हंसी थी
झूले वाली दो चोटी
फूल एक लगाती थी
कभी मुझको दे जाती थी
मेरे गालों पर कर चिमटी
मुझको बहुत सताती थी
पड़ोस की वह लड़की
मुझे कंकर मार हंसी थी
लाल सुर्ख जोड़ा,गले फूलमाला
मेहंदी,गहनों से लदी थी
मेरे दोनों गालों को चूम
बहुत रोयी और हंसी थी
पड़ोस की वह लड़की थी
कंकर, चोटी का फूल,
मै कैसे जाउँ भूल
मिठाई,चॉकलेट वह चिमटी
मेरे यादों में है सिमटी
पड़ोस की वह लड़की थी
मुझे कंकर मार हंसी थी