आज कुछ मैंने बेनाम से खत लिखे,
जो दिल में थे वो सारे एहसास लिखे !
सोचा था लिखकर कुछ अच्छा लगेगा,
पर ये तो पुरानी यादों में फिर खो गया !
एक बार आज फिर उनकी याद आयी,
हमने भी कैद आंसू आज़ाद कर दिए !
वो सारे खत भी आग के हवाले कर दिए,
उस से बचे तो पानी से भिगो दिए !
अब न तो बचा कोई उनसे जुड़ा एहसास,
और न ही दिल की उनको पाने की आरजू !!