कविता - मेरा सामान लौटा दो
जब चांदनी रातों में
तुम साथ होते
तुम्हारी गोद में मेरा सर होता
मेरे बदन की वो खुशबू
भीनी भीनी सी
भीगी भीगी मेंहदी की महक
झीनी झीनी सी
वो पल वो यादें
वो कसमें और वादे
जो तेरी बाहों में छोड़ आये
सब लौटा दो
मेरा सामान मुझे लौटा दो